Haryana Universities Admission – Common Entrance Test from 2017-18 Session

From the academic session 2017-18, a common entrance test will be introduced for the admission to universities of Haryana state. This common entrance exam will be having Multiple Choice Questions (M.C.Q) and also the negative marking. Once the exam is conducted, the counseling will be hosted on three levels.

The classes in the affiliated colleges will be started from July 1, 2017. The complete admission process shall be followed before this period. This decision is taken in a meeting held under the presidency of S.K. Jakhar, Vice-Chancellor Prof. of Chaudhry Bansilal University, Bhiwani (CBLU).

Haryana Universities Common Admission Test


The officers and the representatives from various universities and the higher education department attended this meeting and agreed on the implementation of the common admission test for Haryana state universities. An online website will be created for the specific test.

Till now, the admission in the U.G Courses is given on the basis of merit list curated from Class 12th marks. The marks obtained in the graduation are used to make the merit list for admission in the master degree courses.

The online counseling will take place before the physical counseling. The candidate who doesn’t attend this entrance test won’t get admission in any of the colleges under MDU, KUK, CDLU, CBLU, BPSMV etc.


प्रदेश की यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए होगा कॉमन एंट्रेंस टेस्ट. हरियाणा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अब से टेस्ट देना होगा। शैक्षणिक सत्र 2017-18 से यह लागू होगा। प्रश्न मल्टीपल चॉइस होंगे और पेपर में निगेटिव माकिंग भी होगी।

फिजिकल काउन्सलिंग से पहले ऑनलाइन काउन्सलिंग की जाएगी. काउंसलिंग प्रक्रिया तीन बार में पूरी की जाएगी. कक्षाएं 1 जलाई 2017 से शुरू होंगी. मीटिंग में कुरुक्षेत्र, भिवानी के उच्च अधिकारी और हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के उप-निदेशक अरुण जोशी मौजूद थे जहाँ CBLU विवि के कुलपति प्रो. एसके, जाखड़ की अध्यक्षता में ये फैसला लिया गया है।

कुछ एक विषयों पर universities अपने लेवल पर भी प्रवेश दे सकती हैं जबकि ज्यादातर विषयों के लिए प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होना जरूरी है. प्रत्येक दो साल के बाद सामान्य एंट्रेंस टेस्ट के लिए इन विश्वविद्यालयों में अदला-बदली की जाएगी। इस परीक्षा और काउन्सलिंग के लिए अलग से आधिकारिक वेबसाइट बनायी जा रही है.

अब तक 12th कक्षा में प्राप्त अंको के आधार पर ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन दिया जाता था. मास्टर डिग्री के कोर्सेज के लिए ग्रेजुएशन के अंको के आधार पर मेरिट लिस्ट बनती थी. सरकार तथा विश्वविद्यालयों के इस सराहनीय कदम से ना सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि उन विद्यार्थियों को भी अपना पक्ष दिखाने का मौका मिलेगा जो ज्यादा नंबर ना होने की वजह से एडमिशन से वंचित रह जाते थे.

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